सबसे लंबी और सबसे छोटी उम्र वाले देशों के बीच क़रीब 30 साल का फ़र्क़ है। हांगकांग में जन्मा शिशु औसतन क़रीब 85 साल जीने की उम्मीद कर सकता है, जबकि चाड में यह आँकड़ा क़रीब 53 है। इस लेख में हम साइट के 70 देशों में से सबसे ऊँची और सबसे कम जीवन प्रत्याशा वाले दस-दस देशों को देखते हैं और समझाते हैं कि इस अंतर की वजह क्या है। आँकड़े संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2024 और विश्व बैंक के डेटा से लिए गए अनुमानित मान हैं।

सबसे ज़्यादा जीवन प्रत्याशा वाले 10 देश

सूची में सबसे ऊपर पूर्वी एशिया और पश्चिमी यूरोप के देश हैं। जापान और दक्षिण कोरिया क़रीब 84 पर हैं, स्विट्ज़रलैंड भी क़रीब 84 के साथ ठीक पीछे है। नॉर्वे, स्वीडन, स्पेन, इटली, ऑस्ट्रेलिया और फ़्रांस क़रीब 83 के आसपास जुटे हैं। हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है और देश नहीं गिना जाता, पर उसका डेटा देशों जैसी ही पद्धति से निकाला जाता है, इसलिए हमने उसे सूची में रखा है।

देशजीवन प्रत्याशा, वर्ष5 वर्ष से कम की मृत्यु, प्रति 1,000प्रति व्यक्ति आय, हज़ार $
हांगकांगक़रीब 85क़रीब 2क़रीब 70
जापानक़रीब 84क़रीब 2क़रीब 50
दक्षिण कोरियाक़रीब 84क़रीब 3क़रीब 52
स्विट्ज़रलैंडक़रीब 84क़रीब 4क़रीब 85
नॉर्वेक़रीब 83क़रीब 2क़रीब 90
स्वीडनक़रीब 83क़रीब 2.5क़रीब 64
स्पेनक़रीब 83क़रीब 3क़रीब 50
इटलीक़रीब 83क़रीब 3क़रीब 55
ऑस्ट्रेलियाक़रीब 83क़रीब 4क़रीब 65
फ़्रांसक़रीब 83क़रीब 4क़रीब 58

सबसे कम जीवन प्रत्याशा वाले 10 देश

निचले सिरे पर सहारा के दक्षिण के अफ़्रीकी देश उभरते हैं। चाड (क़रीब 53), नाइजीरिया (क़रीब 54) और सोमालिया (क़रीब 56) सबसे छोटे तीन औसत देते हैं। अंगोला और दक्षिण अफ़्रीका क़रीब 62 साल के साथ नाइजर के बराबर हैं। इन तीनों में से तालिका में नाइजर है, क्योंकि वहाँ पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर सबसे ऊँची है।

देशजीवन प्रत्याशा, वर्ष5 वर्ष से कम की मृत्यु, प्रति 1,000प्रति व्यक्ति आय, हज़ार $
चाडक़रीब 53क़रीब 107क़रीब 1.6
नाइजीरियाक़रीब 54क़रीब 107क़रीब 5.8
सोमालियाक़रीब 56क़रीब 104क़रीब 1.4
आइवरी कोस्टक़रीब 59क़रीब 75क़रीब 6.5
बुर्किना फ़ासोक़रीब 60क़रीब 80क़रीब 2.4
मोज़ाम्बिकक़रीब 60क़रीब 66क़रीब 1.5
डीआर कांगोक़रीब 61क़रीब 76क़रीब 1.4
कैमरूनक़रीब 61क़रीब 70क़रीब 4.5
मालीक़रीब 61क़रीब 94क़रीब 2.5
नाइजरक़रीब 62क़रीब 115क़रीब 1.5

अंतर ज़्यादातर बचपन में बनता है

जीवन प्रत्याशा के अंतर का बड़ा हिस्सा पहले पाँच सालों में बनता है। तालिका के पहले दस देशों में पाँच साल से कम की मृत्यु दर क़रीब 2 से 4 प्रति 1,000 के बीच है। सबसे निचले देशों में यह क़रीब 66 से 115 प्रति 1,000 है। यानी चाड या नाइजर में क़रीब 10% शिशु पाँचवाँ जन्मदिन नहीं देख पाते। औसत निकालते समय ये शुरुआती मौतें आँकड़े को काफ़ी नीचे खींच देती हैं। पाँच साल पार कर चुका चाडवासी जन्म के समय के 53 साल से साफ़ ज़्यादा जीने की उम्मीद कर सकता है।

इनमें से ज़्यादातर मौतों के कारण रोके जा सकने वाले हैं। मलेरिया, दस्त, निमोनिया और प्रसव की जटिलताएँ टीकों, साफ़ पानी, एंटीबायोटिक और प्रशिक्षित दाई की मदद से बहुत हद तक टाली जा सकती हैं। अमीर देशों को ये साधन दशकों पहले मिल गए थे, इसलिए इतिहास में जीवन प्रत्याशा की ज़्यादातर छलाँगें बाल मृत्यु घटने से आईं।

स्वास्थ्य सेवा, पानी और पोषण

सूची के ऊपरी देशों में सबके लिए उपलब्ध स्वास्थ्य प्रणाली, नियमित जाँच, कैंसर स्क्रीनिंग और दिल की बीमारियों का इलाज वयस्क सालों में भी उम्र बढ़ाते हैं। जापान में खान-पान और कम मोटापे को, स्पेन और इटली में भूमध्यसागरीय आहार को औसत ऊपर ले जाने वाले कारकों में गिना जाता है। निचले देशों में प्रसव के लिए जाती महिला के लिए भी निकटतम स्वास्थ्य केंद्र घंटों दूर हो सकता है। साफ़ पीने का पानी और ठीक सीवर व्यवस्था दस्त से होने वाली मौतें घटाने के सबसे सस्ते तरीक़ों में हैं, और सूची के निचले देशों में ये सेवाएँ अब भी आम नहीं हैं।

आय मायने रखती है, पर अकेली काफ़ी नहीं

तालिकाएँ आय और जीवन प्रत्याशा के बीच मज़बूत संबंध दिखाती हैं। ऊपर के सभी दस देशों में प्रति व्यक्ति आय क़रीब 50 हज़ार डॉलर या उससे ज़्यादा है, नीचे के दस में क़रीब 1.4 से 6.5 हज़ार डॉलर के बीच। फिर भी यह संबंध पूरा नहीं है। बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय क़रीब 9 हज़ार डॉलर है और जीवन प्रत्याशा क़रीब 74। दक्षिण अफ़्रीका में आय क़रीब 15 हज़ार डॉलर है, पर जीवन प्रत्याशा क़रीब 62। प्रमुख कारणों में एचआईवी/एड्स और तपेदिक जैसी बीमारियाँ गिनाई जाती हैं। अमेरिका क़रीब 80 हज़ार डॉलर प्रति व्यक्ति आय के साथ आय की सूची में ऊपर है, पर जीवन प्रत्याशा क़रीब 78 होने से पहले दस में नहीं आता।

आय सेहत में कितनी बदलती है, यह इस पर भी निर्भर है कि पैसा कहाँ ख़र्च होता है और कितने लोगों तक पहुँचता है।

युद्ध, संघर्ष और कमज़ोर राज्य

सूची के निचले कई देशों में संघर्ष, राजनीतिक अस्थिरता या कमज़ोर राज्य-व्यवस्था भी है। सोमालिया, माली, बुर्किना फ़ासो और डीआर कांगो इसी समूह में आते हैं। स्वास्थ्य केंद्र बंद हो जाते हैं, टीकाकरण अभियान अधूरे रह जाते हैं, लोग विस्थापित होते हैं और खाद्य सुरक्षा बिगड़ती है। ऐसी स्थितियों में बाल मृत्यु तेज़ी से बढ़ सकती है और जीवन प्रत्याशा कुछ ही सालों में पीछे जा सकती है।

क्या अंतर घट रहा है?

1950 के दशक में दुनिया की जीवन प्रत्याशा क़रीब 46 साल थी, आज क़रीब 73 है। सबसे तेज़ प्रगति कम आय वाले देशों में हुई। बांग्लादेश, नेपाल और इथियोपिया जैसे देशों ने कुछ दशकों में जीवन प्रत्याशा बीस साल से ज़्यादा बढ़ाई। लेकिन कुछ देशों में यह सिलसिला टूटा: दक्षिण अफ़्रीका में एचआईवी महामारी के दौरान और रूस में 1990 के दशक के आर्थिक पतन में औसत गिरा। कुल मिलाकर अंतर घट रहा है, पर सीधी रेखा में नहीं, और यह स्वास्थ्य में निवेश तथा देशों के सामने आने वाले संकटों पर निर्भर करता है।

यह आँकड़ा तुम्हारे लिए क्या मतलब रखता है?

जीवन प्रत्याशा किसी ख़ास साल की मृत्यु दरों से निकाला गया औसत है। आज जन्मा शिशु अक्सर लिखे आँकड़े से ज़्यादा जीता है, क्योंकि चिकित्सा आगे बढ़ती है। पर तुम किस देश में जन्म लोगे, यह शुरुआती सालों के ज़्यादातर जोखिम और बाद के मौक़े तय करता है। अगर पासा फेंककर अपना जन्म-देश देखना चाहते हो तो खेल पर जा सकते हो।